बैरिया विधान सभा क्षेत्र में मृत्युजंय तिवारी की पहचान एक नेता की : प्रतिबद्धता और राजनीतिक संतुलन से पहचाने जाते हैं मृत्युजंय तिवारी उर्फ बबलू तिवारी
Ajay Mishra
Tue, Feb 10, 2026
संवाददाता जितेन्द्र यादव जीतू
बलिया। समकालीन राजनीति के शोर, अवसरवाद और तात्कालिक लाभ की संस्कृति के बीच कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं जो बिना शोर किए अपनी चमक से पहचाने जाते हैं, बबलू तिवारी ऐसे ही राजनेताओं में गिने जाते हैं—जो पद से नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता और राजनीतिक संतुलन से पहचाने जाते हैं।
बबलू तिवारी की राजनीति किसी आकस्मिक उभार का परिणाम नहीं है। यह राजनीति अनुशासन, संगठन, वैचारिक स्पष्टता और निरंतर जन-संपर्क की लंबी साधना से निकली हुई राजनीति है। उन्होंने सत्ता को लक्ष्य नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम बनाया । यही कारण है कि लगातार ब्लॉक प्रमुख बेलहरी पद पर रहते हुए भी उनकी पहचान केवल “सत्ताधारी” की नहीं, बल्कि “समाधान देने वाले नेता” की बनी रही।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे राजनीति को व्यक्ति केंद्रित नहीं, बल्कि विचार केंद्रित रखा। समकालीन राजनीति जहाँ अक्सर त्वरित लोकप्रियता, बयानबाज़ी और सोशल मीडिया की तात्कालिक तालियों पर निर्भर दिखती है, वहीं बबलू तिवारी ने धैर्य, संवाद और नीति की भाषा को प्राथमिकता दी। वे न तो अनावश्यक टकराव में विश्वास रखते हैं, न ही भीड़ को बहकाने वाली राजनीति में।
ब्लॉक प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल इस बात का उदाहरण रहा कि प्रशासन और राजनीति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है। उन्होंने नीतिगत निर्णयों में ज़मीनी यथार्थ को समझा और कार्यकर्ताओं, अधिकारियों तथा आम नागरिक—तीनों के बीच संवाद की सेतु-भूमिका निभाई। यही कारण है कि वे आज भी संगठन और समाज—दोनों में सम्मान के साथ देखे जाते हैं।
युवा पीढ़ी के लिए उनका राजनीतिक जीवन एक महत्वपूर्ण संदेश देता है—कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की प्रक्रिया भी है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि बिना वैचारिक समझ के राजनीति केवल शोर बन जाती है, और बिना सेवा-भाव के सत्ता बोझ बन जाती है।
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