: प्रकृति की आराधना है,छठ पूजा-अंजली तोमर
Thu, Nov 7, 2024
बलिया। छठ महापर्व को पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति प्रेम का सबसे बड़ा त्यौहार मानते हुए सहायक अध्यापिका अंजली तोमर ने अपने विद्यालय को डुरंटा 101पौधा प्रदान कर यह संकल्प लिया कि मैं अपने विद्यालय को स्वच्छ वातावरण से परिपूर्ण करूंगी। इसके लिए चाहे मुझे अपने वेतन से जो धन खर्च करना पड़े करुंगी। अंजली तोमर ने बताया कि जिस स्थान पर हम कार्य करते है वह अपने निवास स्थान से खूबसूरत होना चाहिए मेरी कर्मस्थली मेरे लिए देवालय है मै निरंतर इसके लिए कार्य करती रहूंगी साथ ही जब विद्यालय का वातावरण खूबसूरत होगा तो बच्चों के नामांकन और ठहराव में यह उपयोगी होगा ।
उन्होंने छठ पर्व के बारे में बताया कि छठ पूजा का सबसे महत्त्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी पवित्रता और लोकपक्ष है। भक्ति और आध्यात्म से परिपूर्ण इस पर्व में बाँस निर्मित सूप, टोकरी, मिट्टी के बर्त्तनों, गन्ने का, गुड़, चावल और गेहूँ से निर्मित प्रसाद और सुमधुर लोकगीतों से युक्त होकर लोक जीवन की भरपूर मिठास का प्रसार करता है।
शास्त्रों से अलग यह जन सामान्य द्वारा अपने रीति-रिवाजों के रंगों में गढ़ी गयी उपासना पद्धति है। इसके केंद्र में वेद, पुराण जैसे धर्मग्रन्थ न होकर किसान और ग्रामीण जीवन है। इस व्रत के लिए न विशेष धन की आवश्यकता है न पुरोहित या गुरु के अभ्यर्थना की। जरूरत पड़ती है तो पास-पड़ोस के सहयोग की जो अपनी सेवा के लिए सहर्ष और कृतज्ञतापूर्वक प्रस्तुत रहता है। इस उत्सव के लिए जनता स्वयं अपने सामूहिक अभियान से संगठित होती है। नगरों की सफाई, व्रतियों के गुजरने वाले रास्तों का प्रबन्धन, तालाब या नदी किनारे अर्घ्य दान की उपयुक्त व्यवस्था के लिए समाज सरकार के सहायता की राह नहीं देखता। इस उत्सव में खरना के उत्सव से लेकर अर्ध्यदान तक समाज की अनिवार्य उपस्थिति बनी रहती है। यह सामान्य और गरीब जनता के अपने दैनिक जीवन की मुश्किलों को भुलाकर सेवा-भाव और भक्ति-भाव से किये गये सामूहिक कर्म का विराट और भव्य प्रदर्शन होता है।
: सामाजिक सौहार्द,आस्था व विश्वास का महापर्व छठ/सूर्य षष्ठी आज
Thu, Nov 7, 2024
बलिया।आस्था और श्रद्धा का महापर्व छठ/सूर्य षष्ठी बलिया जनपद में लम्बे समय से मनाया जाता है पहले शहर के लोग/व्रती महिलाएं/श्रद्धालु शहर के दक्षिणी तरफ जो नदी के किनारे महाबीर घाट, बालेश्वर मन्दिर(शनिचरी)घाट,गौशाला रोड घाट और पूरब तरफ ग्रामीण क्षेत्रों जमुआ,बाबुराम तिवारी के छपरा(शिवराम पुर),नगवां जनाड़ी, पाण्डेय पुर,दुबहर और पश्चिम तरफ बिजयीपुर हैबतपुर,माल्देपुर,सागरपाली,थमनपुरा,कोट अजोरपुर तक मजमा ही मजमा हुआ करता था। मेले का माहौल था,समाजसेवी संस्थाएं घाट की साफ-सफाई कर बिजली बत्ती की सजावट से लेकर ध्वनिविस्तारक यंत्र से अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें,दीया जलाने समय इस बात का ध्यान रखें कहीं कोई आग लगने की घटना न घट जाय आदि घोषणाएं किया करते हैं। समय के साथ नदी के किनारे कब्जा हो जाने/आवास बन जाने तथा शहर की अनियंत्रित भींड़ के कारण कुछ तब्दीलियां होनी शुरु हो ग ई,शहर के राम लीला मैदान,भृगु मन्दिर प्रांगण या अन्य खुले स्थानों पर इसकी शुरुआत हुई जो जरुरी भी था। गांवों में तालाब पोखरों के किनारे तो यह पर्व मनाया ही जाता था अब छतों पर भी इसकी शुरुआत कुछ वर्षॊं से हो ग ई है।
पहले महिलाएं/व्रती/श्रद्धालु जल में घंटों खड़ी रह कर सूर्यास्त का इंतजार करती रहती थी और बिल्कुल डूब जाने की स्थिति में हो जाने पर अर्घ/पूजन का कार्यकरती थी,फिर सुबह जैसे ही सूर्य उदय होने को होता है लालिमा की शुरुआत होते ही अर्घ पूजन कर व्रत को परिपूर्ण मानकर सामाजिक समरसताकायम रखते हुए प्रसाद का आदान-प्रदान व एक दूसरे को सिन्दूर लगाने का कार्य भी करती हैं। इसमें या एकदूसरे के पास बैठने में बड़े-छोटे या उच्च-निच का कोई भाव किसी के मन में होता ही नहीं है जिसको जहां स्थान मिला बैठ कर अपना पूजन करता है।वास्तव में यह व्रत ही बड़े-छोटे/शक्तिशाली-कमजोर के भाव के विपरीत भाव को लेकर शुरू होता है,ऐसे सामाजिक सदभाव ,सौहार्द ,शान्ति ,समृद्धि और सादगी से परिपूर्ण पहले डूबते हुए सूर्य अथार्त हम कमजोर व शक्तिशाली में कोई भेद नहीं करते फिर उगते हुए सूर्य का पूजन यानि हममे किसी तरह का कोई फर्क करने का मन नहीं रहता हम समान भाव से बड़ों-छोटों सभी को आदर व स्नेह करते देते हैं।ऐसे महापर्व की आप सभी श्रद्धालुओं को बलिया न्यूज 24 की ओर से बहुत बहुत बधाई।
: मानवता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं, मदद संस्थान से जुड़ने का आह्वान
Sun, Oct 20, 2024
बलिया । समाज का प्रत्येक मानव अगर एक दूसरे की मदद के लिए हाथ बढ़ाए तो बहुत हद तक सामाजिक असमानता को दूर किया जा सकता है । उक्त उद्गार भृगु मंदिर के प्रांगण में मदद संस्थान की मासिक बैठक में अध्यक्ष अखिलानंद तिवारी ने कहीं । उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा को संकल्पित मदद संस्थान अपनी पूरी निष्ठा के साथ उन लोगों के लिए कार्य कर रहा है जो वास्तव में असहाय हैं पीड़ित हैं बेसहारा है लाचार हैं बीमार हैं अथवा बेहद जरूरतमंद हैं । कहा कि अपने पंद्रह माह के कार्यकाल में मदद संस्थान ने अनेक ऐसे लोगों को खोज-खोज करके मदद करने का काम किया है जो बेहद जरूरतमंद थे । उन्होंने इस बैठक में सदस्यों द्वारा रखे गए प्रस्ताव जैसे प्रत्येक सदस्य का परिचय पत्र बनाना, कार्तिक पूर्णिमा में गंगा घाट पर महिलाओं को वस्त्र बदलने के लिए टेंट लगाना, प्रत्येक गांव में मदद संस्थान के ग्राम अध्यक्ष की नियुक्ति करना, सामूहिक बीमा का प्रस्ताव तैयार करना,संस्थान का वेबसाइट तत्काल लॉन्च करना आदि प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाई ।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए संत पवनजी महाराज ने कहा कि समाज में मदद संस्थान जैसे संगठन का उत्पन्न होना ही एक जागरूक समाज की पहचान है । आज यह संगठन परिचय का मोहताज नहीं है इसके द्वारा किए गए कार्य ही इसके सफलता की कहानी लोगों की जुबान से निकल रहा है । उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि मदद संस्थान एक दिन जरूर ऊंचाइयों को छूएगा । क्योंकि इसका उद्देश्य और क्रियाकलाप काफी पवित्र और सराहनीय है । इस संस्थान के प्रत्येक सदस्य प्रभु के बहुत ही कृपा पात्र हैं जिन्हें लोगों की सेवा करने का मौका मिल रहा है । इस अवसर पर उपस्थित प्रत्येक सदस्यो ने बारी बारी से अपने विचार प्रकट करते हुए संस्थान के सक्रियता और मजबूती के लिए आवश्यक सुझाव प्रस्तुत किये । जिसका सभी लोगों ने ताली बजाकर समर्थन किया ।
बैठक में मुख्य रूप से अखिलानंद तिवारी, विवेक सिंह, अजय मिश्र, गणेशजी सिंह, रणजीत सिंह ,श्रवण कुमार पांडेय, बब्बन विद्यार्थी ,नितेश पाठक, नित्यानंद पांडेय, पन्नालाल गुप्ता, बच्चनजी प्रसाद, विश्व दीपक उपाध्याय चंद्रभानु प्रताप सिंह ,रमेश मिश्रा ,गंगासागर राम ,श्रीभगवान चौधरी, जितेंद्र मिश्रा, बरमेश्वर पांडेय, मुनेश्वर गिरी ,धीरेंद्र शुक्ला, मनीष पाठक ,दर्दर गिरी ,सुनील शर्मा, अभय गिरी सहित अनेक लोगों उपस्थित थे । बैठक की अध्यक्षता संत पवनजी महाराज एवं संचालन शिक्षक गणेशजी सिंह ने किया ।