सम्पादकीय लेख,सम्पादक जगदीश सिंह : अब तो इस राह से वो शख्स गुजरता भी नहीं,अब किस उम्मीद से दरवाज़े से झांके कोई
Ajay Mishra
Wed, Nov 26, 2025
✍🏾जगदीश सिंह सम्पादक✍🏾
जीवन की बागवानी में वक्त के साथ प्राकृतिक परिवर्तन होता ही रहता है लेकिन कुछ सुगन्धित पुष्प दिल में जो सुगन्ध भर देते हैं वह जिंदगी के आखरी लम्हे तक कसक पैदा करते रहते हैं। समय बदल जाता है लोग बदल जाते हैं लेकिन एहसास वहीं स्थिर रहता है। मन के आंगन मे नाचते मयूर के तरह जो छबि अंकित हो जाती उसको मिटाना आसान नही! भूलना मुश्किल हो जाता है! निस्स्वार्थ प्रेम की तस्वीर में जब चाहत का रंग सलीके से भर जाता है तो वह दिल में उतर जाता है उसके आगे हर रंग फीका लगता है। बदलाव की बहती बयार में दीदार भले ही न हो मगर जिनके सानिध्य में मुस्कराती खिलखिलाती जिंदगी पनाह पाती रही वक्त का आशियाना जगमगाता रहा,दिल की दहलीज पर पहुंच कर जिनकी आशिक़ी आहें भरती रहीं वह लम्हा तन्हा होने पर बहुत याद आता है! वह पल निश्चित रूप से अमरत्व प्राप्त कर लिया होता है। जरा सोचिए उम्र के उफान मे अभिनव अकाट्य अप्रदर्शित, मर्यादित, तरंगित, प्रफुल्लित आवरण में जिनको दिल से वरण किया अगर उनसे ही साथ ज़िन्दगी की दोपहरी में में छूट जाए तो क्या पल पल गुजरे उस लम्हों की महक में उस शख्सियत को भूलना आसान होगा! दिल की गहराईयों में उठते दर्द के बीच अश्कों की बहती धारा से भीगे मायूस चेहरे से छलक कर निकली इबारत सच को बयां कर ही देती है।कभी-कभी किसी से इतना गहरा लगाव हो जाता है, कि वो सिर्फ इंसान नहीं रहता एहसास बन जाता है¡ ऐसा एहसास,जो सांसों की तरह होता है दिखता नहीं, पर उसके बिना सब कुछ अधूरा लगता है! बस एक दिन उससे बात न हो,तो लगता है जैसे दिन अधूरा है! फोन की स्क्रीन बार-बार जलती है!हर नोटिफिकेशन पर दिल धड़कता है! शायद उसी का मैसेज हो? -पर जब नहीं होता,तो वो धड़कन भी खामोशी में बदल जाती है! कभी लगता है खुद से कह दूं क्या हुआ,एक दिन ही तो बात नहीं हुई।पर दिल मानता कहां है! वो कहता है एक दिन नहीं,पूरी उम्र सूनी लग रही है उनके बिना!सात फेरों में जीवन भर साथ निभाने का वादा किया था फिर तन्हाई मे छोड़ कर चली गयी! उसके साथ गुजरे हर लम्हे की याद आती है! उसकी हंसी याद आती है! वो छोटे-छोटे नखरे,वो ‘पता नहीं’! बोलकर छेड़ना वो हर बात में छिपा है! वो जब कहती थी तुम पागल हो ना,और मैं जवाब देता था,तेरे लिए ही तो! और अब एहसास होता है जीवन साथी का मतलब हमेशा साथ होना नहीं! कभी-कभी बस उसका न होना ही ये जताने को काफी होता है कि वो तुम्हारे भीतर कितना गहराई तक उतर चुकी है।शायद यही मोहब्बत है! जब एक दिन की खामोशी,हज़ार बातों से ज़्यादा बोल जाती है और उस खामोशी में भी बस एक ही आवाज़ आती है कहां जा रहे हैं कब तक आयेंगे ! यह आवाज आज भी जब भी घर से कदम बाहर निकलते हैं कानों में गूंजने लगती है। कदम ठीठक जाते हैं मगर सूनी हवेली में बस एहसास रह गया है सोच के समन्दर में जज़्बात की उठती लहरों के बीच मोहब्बत की सफ़ीना कब साहिल पर लंगर डाल दी पता ही नहीं चला! अब तो बस यादों का कारवां रह रह कर झंझावाती हवाओं के बीच अश्कों की वर्षांत में चेहरे को भीगोता रहता है! यह तो आनी जानी दुनियां सभी को अपना किरदार निभाकर वापस चले जाना है! अब तन्हाई जिंदगी के आखरी सफर तक साथ निभाएंगी! ----------------??
गुजरा हुआ ज़माना आता नहीं दुबारा? हाफिज खुदा तुम्हारा--------!!
सबका मालिक एक
ऊं साई राम🌹🌹🙏🏾🙏🏾श्रद्धा सबुरी।
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