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हांली क्रास स्कूल में खिलाई ग ई फाइलेरिया रोधी दवा

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फाइलेरिया रोधी अभियान,खिलाया जा रहा है फाइलेरिया न होने की दवा : हांली क्रास स्कूल में खिलाई ग ई फाइलेरिया रोधी दवा

Ajay Mishra

Sat, Feb 14, 2026

बलिया,14 फ़रवरी 2026 राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (आईडीए) के अंतर्गत शनिवार को हॉली क्रॉस स्कूल मे अभिभावक- शिक्षक बैठक के अवसर पर कुल 1656 छात्र-छात्राओं उनके अभिभावकों तथा स्कूल के स्टाफ को फाइलेरिया से बचाव की दवा आईवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल खिलायी गयी।

यह जानकारी वेक्टर जनित बीमारियों के नोडल अधिकारी डॉ० अभिषेक मिश्रा ने दी।

नोडल अधिकारी ने छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को फाइलेरिया रोग के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि इस बीमारी के दुष्परिणाम 5 से 15 साल बाद देखने को मिलते हैं । शुरूआत में इसके कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं और जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रसित व्यक्ति को काटता है तो वह संक्रमित हो जाता है और जब यही मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के परिजीवी रक्त के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी फाइलेरिया से ग्रसित कर देते हैं। इस बीमारी से हाथ, पैर, स्तन और अंडकोष में सूजन पैदा हो जाती है। सूजन के कारण फाइलेरिया प्रभावित अंग भारी हो जाता है और दिव्यांगता जैसी स्थिति बन जाती है । प्रभावित व्यक्ति का जीवन अत्यंत कष्टदायक हो जाता है। यह एक लाइलाज बीमारी है |

उन्होंने कहा कि जनपद में जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्साधिकारी के नेतृत्व में 28 फ़रवरी तक फाइलेरिया उन्मूलन आईडीए अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अन्तर्गत घर-घर जाकर एक वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों को छोड़कर सभी को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए आइवरमेक्टिन डी.ई.सी और एल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक घर-घर जाकर स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने खिलाएंगे एवं किसी भी स्थिति में दवा का वितरण नहीं किया जायेगा। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है जिसे सामान्यतः हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है। पेशाब में सफेद रंग के द्रव्य का जाना जिसे काईलूरिया भी कहते हैं जो फाइलेरिया का ही एक लक्षण है। इसके प्रभाव से पैरों व हाथों में सूजन, पुरुषों में हाइड्रोसील (अंडकोष में सूजन) और महिलाओं में ब्रेस्ट में सूजन की समस्या आती है। फाइलेरिया होने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने मे स्वास्थ्यकर्मियों ने पूरी सावधानी एवं अनुशासन के साथ बच्चों को दवाएँ प्रदान कीं तथा आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी दी।

विद्यालय प्रशासन की ओर से इस शिविर को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया गया। विद्यालय की प्रिंसिपल सिस्टर मेरी जॉन एवं वाइस प्रिंसिपल सिस्टर वायलेट मेरी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में कार्यक्रम सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।

इस अवसर पर शिविर को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों अनुराग श्रीवास्तव, सुनील सिंह, दीनानाथ गुप्ता, बी. एन. तिवारी, कृष्णा सिंह, राजीव पांडे, इशरत शाहीन, बृजेश कुमार ओझा, अजीत कुमार, कुमारी खुशबू एवं टीटो थॉमस का उल्लेखनीय योगदान रहा। सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों की व्यवस्था एवं अनुशासन बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई।

विशेष उल्लेखनीय है कि उसी दिन विद्यालय में आयोजित पेरेंट-टीचर मीटिंग के कारण अभिभावकों ने भी इस मेडिकल शिविर में बढ़-चढ़कर भाग लिया। अभिभावकों ने न केवल शिविर को सफल बनाने में सहयोग किया, बल्कि स्वयं भी फाइलेरिया से बचाव हेतु दवा का सेवन किया।

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