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तीन बार उच्च सदन और एक बार लोकसभा सांसद रहे स्वतंत्रता सेनानी सामाजिक चिंतक तारकेश्वर पाण्डेय याद किए गये

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स्वतंत्रता सेनानी व सांसद तारकेश्वर पाण्डेय याद किए गये : तीन बार उच्च सदन और एक बार लोकसभा सांसद रहे स्वतंत्रता सेनानी सामाजिक चिंतक तारकेश्वर पाण्डेय याद किए गये

बलिया। पंडित तारकेश्वर पांडेय (1910–1989) देश के एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, आदर्श राजनेता और समाज के वंचित वर्ग के पैरोकार थे। बलिया और पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक उत्थान में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है।

उनके जीवन से जुड़ी कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका

* आजादी के सिपाही: तारकेश्वर पांडेय जी छात्र जीवन (हाईस्कूल) से ही देश को आजाद कराने की मुहिम में कूद पड़े थे। उन्होंने महात्मा गांधी और कांग्रेस के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

* जेल यात्राएं: देश की आजादी के लिए संघर्ष करते हुए उन्होंने लगभग 6 साल तक जेल की यातनाएं सहीं, लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के सामने कभी घुटने नहीं टेके।

राजनीतिक सफर

आजादी के बाद वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के एक मजबूत स्तंभ बने और देश के शीर्ष नेताओं (जैसे जवाहरलाल नेहरू) के करीबी सहयोगियों में गिने जाने लगे।

* राज्यसभा सांसद: वह 1952 से 1970 तक लगातार कई बार राज्यसभा के सदस्य (सांसद) रहे। उन्होंने संसद के उच्च सदन की शुरुआती बहसों में उत्तर प्रदेश और विशेषकर पूर्वांचल का प्रतिनिधित्व किया।1952-58,1958से 1964 और 1964 से 1970 तक उच्च सदन राज्य सभा के सदस्य रहे।

* लोकसभा सांसद: साल 1971 के आम चुनाव में उन्होंने सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से भारी मतों (लगभग 62.83% वोट) से जीत हासिल की और पांचवीं लोकसभा के सदस्य बने।

* संगठनात्मक भूमिका: वह 1952 से 1957 के दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) के सचिव और महासचिव भी रहे।

सामाजिक और शैक्षिक योगदान

* गरीबों के मसीहा: स्थानीय जनता और समकालीन राजनेता उन्हें "गरीबों का मसीहा" और समाजवाद का पोषक मानते थे। उन्होंने सामंतवाद का कड़ा विरोध किया और हमेशा ग्रामीण व पिछड़े इलाकों के विकास की आवाज उठाई।

* शिक्षा को बढ़ावा: उन्होंने बलिया और आसपास के क्षेत्रों में कई स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना व संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ताकि युवाओं को बेहतर शिक्षा मिल सके।

* पत्रकारिता: बलिया के स्थानीय इतिहास में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि उन्होंने सामाजिक चेतना जगाने के लिए 'बलिया के लावा बोल द धावा' जैसे स्थानीय स्तर पर वैचारिक माध्यमों की चर्चा की।

बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज (SC College) चौराहे पर उनकी प्रतिमा स्थापित है, जहां हर साल उनके स्मृति दिवस और जयंती पर लोग उन्हें 'बागी बलिया' के एक अप्रतिम नायक के रूप में याद करते हैं।

आज पण्डित तारकेश्वर पाण्डेय को माल्यार्पण और श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनको याद किया गया ।इस अवसर पर बंश रोपण पाण्डेय, डां जनार्दन राय,डां शिव कुमार मिश्र, जे पी पाण्डेय, अशोक मिश्र पप्पू जी,अनिल पाण्डेय, ओ पी मिश्र आदि उपस्थित रहे।

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