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TD कालेज के छात्रसंघ के मंत्री से लेकर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और जेपी और चन्द्रशेखर के खासमखास

जय प्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के प्रिय रामगोविन्द चौधरी

बलिया में भारी बारिश का येलो एलर्ट,1 से 12 तक सभी स्कूल बन्द, प्रशासन मुमुस्तैद

रामगोविन्द चौधरी जय प्रकाश नारायण,चन्द्रशेखर के भी बेहद करीब रहे

मनोनीत होने के बाद पहली बार बलिया आने पर सपा कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया

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रामगोविन्द चौधरी की संघर्ष से समाजवाद तक की यात्रा : TD कालेज के छात्रसंघ के मंत्री से लेकर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और जेपी और चन्द्रशेखर के खासमखास

Ajay Mishra

Sat, Sep 26, 2026

बलिया “जिसने छात्र जीवन में अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना सीखा, उसने पूरी जिंदगी समाज के कमजोर और वंचित तबके की आवाज बनने का संकल्प निभाया।”

9 जुलाई 1953 को जन्मे रामगोविन्द चौधरी जी राजनीति की यात्रा किसी पद या प्रतिष्ठा की तलाश से शुरू नहीं हुई थी। यह यात्रा शुरू हुई थी अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के साहस से, छात्र हितों के लिए संघर्ष से और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से।

तीन भाइयों में सबसे बड़े रामगोविन्द चौधरी जी ने अपने जीवन के प्रारंभिक संस्कार गांव की मिट्टी और सामान्य परिवेश से प्राप्त किए। प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से तथा स्कूली शिक्षा सिकन्दरपुर में प्राप्त करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए सतीश चंद्र कॉलेज में बीएससी में प्रवेश लिया।

लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ छात्र समस्याओं ने उन्हें बेचैन किया। छात्रों के अधिकारों और समस्याओं के समाधान के लिए वे आंदोलनों में सक्रिय हुए। संघर्ष का परिणाम यह हुआ कि उन्हें महाविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। मगर यह निष्कासन उनके कदम रोक नहीं सका। उन्होंने श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलिया में प्रवेश लिया और यहीं से उनकी छात्र राजनीति ने जनआंदोलन का रूप लेना शुरू किया।

छात्र राजनीति से जनसंघर्ष तक वर्ष 1972 में वे टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री निर्वाचित हुए। वर्ष 1974 में छात्रों ने उन्हें पुनः अपना नेता चुना और वे छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

विधायक रहते कानून की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से हासिल किया।

यह वह दौर था जब देश का लोकतंत्र एक कठिन परीक्षा से गुजर रहा था। आपातकाल के समय रामगोविन्द चौधरी जी ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष का रास्ता चुना। जेपी आंदोलन के दौरान वे जनपद छात्र युवा वाहिनी के सह-संयोजक रहे।

उनकी गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया गया। आंदोलन के दौरान टीडी कॉलेज परिसर से उनकी गिरफ्तारी हुई। लगभग 24 महीने तक जेल में रहने के बाद जब वे बलिया जेल से बाहर निकले तो उनके सामने जीवन का एक नया अध्याय इंतजार कर रहा था।

उनकी रिहाई का दिन भी ऐतिहासिक संयोग लेकर आया।

उसी दिन बलिया कलेक्ट्रेट में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन करने पहुंचे थे। रामगोविन्द चौधरी जी के साथ उमड़ा छात्रों का हुजूम देखकर चंद्रशेखर जी ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया। यही मुलाकात आगे चलकर आत्मीय संबंध और राजनीतिक मार्गदर्शन का आधार बनी।

एक संघर्षशील छात्र और एक बड़े समाजवादी चिंतक का यह मिलन रामगोविन्द चौधरी जी के राजनीतिक जीवन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव बना।

विधानसभा से जनसेवा के व्यापक मंच तक

वर्ष 1977 में उन्होंने तत्कालीन चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जनता का विश्वास प्राप्त किया। इसके बाद लगातार पांच बार उन्होंने उस क्षेत्र का विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया।

राजनीति में उनका उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं था। वे राजनीति को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने और उसकी आवाज को सत्ता के गलियारों तक ले जाने का माध्यम मानते रहे।

वर्ष 1991 में उन्हें मुलायम सिंह यादव के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्यान विभाग की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने शासन के स्तर पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।

वर्ष 2000 में वे समाजवादी जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने। वर्ष 2002 में बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में, समाजवादी पार्टी के समर्थन से चुनाव लड़ा और तत्कालीन कैबिनेट मंत्री बच्चा पाठक को लगभग 6,000 मतों से पराजित कर विधानसभा पहुंचे।

वर्ष 2004 में मुलायम सिंह यादव के मंत्रिमंडल में उन्हें बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

राजनीतिक जीवन में पराजय भी आई। वर्ष 2007 में वे बांसडीह से लगभग 264 मतों के अंतर से चुनाव हार गए। लेकिन जिनके जीवन की बुनियाद ही संघर्ष पर टिकी हो, उनके लिए पराजय अंतिम पड़ाव नहीं होती।

वर्ष 2012 में उन्होंने फिर विजय प्राप्त की और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में बेसिक शिक्षा तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के कैबिनेट मंत्री बने। बाद में समाज कल्याण और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाली।

वर्ष 2017 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी श्रीमती केतकी सिंह को लगभग 1,655 मतों से पराजित किया। इस विजय के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल की जिम्मेदारी मिली।

फैसले जो याद किए जाते हैं

रामगोविन्द चौधरी जी की पहचान केवल एक विधायक या मंत्री के रूप में नहीं रही। उनके कार्यकाल के कई निर्णय सीधे शिक्षक, शिक्षा और ग्रामीण लोकतंत्र से जुड़े रहे।

बेसिक शिक्षा मंत्री के रूप में शिक्षकों के खातों में सीधे ऑनलाइन वेतन भेजने की व्यवस्था, शिक्षामित्रों के समायोजन तथा सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों में पदों से अधिक कार्यरत शिक्षकों के अधिसंख्य पदों पर समायोजन जैसे फैसले उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण पहलों में गिने जाते हैं।

पंचायती राज मंत्री के रूप में ग्राम प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखों को मानदेय देने की व्यवस्था भी उनके महत्वपूर्ण निर्णयों में रही।

एक ऐसा सफर जिसमें संघर्ष कभी पीछे नहीं छूटा

रामगोविन्द चौधरी जी के जीवन को केवल चुनावी जीत-हार के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता।

यह उस युवा की कहानी है जिसने छात्र जीवन में सवाल पूछना सीखा।

यह उस संघर्षशील नेता की कहानी है जिसने आपातकाल में जेल जाना स्वीकार किया, लेकिन अपने लोकतांत्रिक विश्वासों से समझौता नहीं किया।

यह उस जनप्रतिनिधि की कहानी है जिसने बार-बार जनता के बीच जाकर उनका विश्वास अर्जित किया।

यह उस समाजवादी की कहानी है जिसने चंद्रशेखर जी के सानिध्य से राजनीतिक संस्कार पाए, मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सरकार में जिम्मेदारियां निभाईं और अखिलेश यादव के नेतृत्व में विधानसभा में नेता विरोधी दल की भूमिका तक पहुंचे।

और सबसे बढ़कर—

यह उस इंसान की कहानी है जिसने राजनीति को अपने लिए केवल सत्ता का साधन नहीं, बल्कि समाज के कमजोर, वंचित और संघर्षरत व्यक्ति की आवाज बनने का माध्यम माना।

रामगोविन्द चौधरी जी की यात्रा हमें यह बताती है कि राजनीति में पद समाप्त हो सकते हैं, चुनाव आते-जाते हैं, सत्ता बदलती रहती है लेकिन संघर्ष से पैदा हुई विचारधारा और जनता के बीच अर्जित विश्वास लंबे समय तक जीवित रहते हैं।

उनकी जीवन यात्रा की सबसे बड़ी पहचान शायद यही है

“संघर्ष से निकला नेतृत्व, समाजवाद से जुड़ी आस्था और जनसेवा को समर्पित जीवन।”

सपा के जिला प्रवक्ता सुशील कुमार पांडेय कान्ह जी ने कहा कि रामगोविंद चौधरी का जाना मेरे लिए केवल एक अपूरणीय क्षति नहीं,बल्कि मेरे जीवन की एक व्यक्तिगत क्षति है जिसकी भरपाई शायद संभव नहीं होगी।

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