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मु्ख्य सम्पादक अजय मिश्र

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'सम्पादकीय लेख' : मु्ख्य सम्पादक अजय मिश्र

आज जो रिपोर्ट इण्डियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुई है,उससे लग रहा है की निर्वाचन आयोग में सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा है ।

निर्वाचन आयुक्तों को जो वैधानिक रुप से समान/बराबर का अधिकार प्राप्त है उस पर अतिक्रमण कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तानाशाही चला रहे हैं और अपना आदेश अपने आयुक्तों को संज्ञान में लिए वगैर अकेले फैसले ले रहे हैं।

निश्चित रुप से ले रहे हैं, क्योंकि दो आयुक्तों ने जो पत्र लिखा है कि पिछले कई महीनों से जो निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त ने लिया है उसमें उनसे कोई मसविरा नहीं लिया गया है जबकि त्रिसदस्यीय कमेटी में सभी निर्णय या तो तीनों की सहमति से लिया जाना है या सर्वसम्मति न होने की स्थिति दो एक के बहुमत से फैसला लिया जाना विधि सम्मति है/कानूनी है।

राज्यों में चलाया गया SIR ना तो सर्वसम्मति है और ना ही दो एक के बहुमत से लिया गया है ।

इस प्रकार ये स्वत: या अकेले लिया गया ज्ञानेश कुमार का निर्णय असंवैधानिक है,इस असंवैधानिक फैसले से लिया गया बिहार,बंगाल का चुनाव भी असंवैधानिक हो जाता है, इस प्रकार बिहार और बंगाल का चुनाव दोबारा कराया जाना चाहिए।

इसी बीच सर्वोच्च न्यायालय का टिप्पणी भी कि निर्वाचन आयोग ना केवल निष्पक्ष होना चाहिए बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए लेकिन निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति सरकार के हांथ में होगी तो चुनाव निष्पक्ष कैसे होंगे?

निर्वाचन आयुक्त या आयुक्तों की नियुक्ति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर अपने सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री होंगे!

ये संवैधानिक बेंच में सर्वोच्च न्यायालय में मामला पहले से है लेकिन आज न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने कह दिया कि नियुक्ति से जुड़ा 2023 का कानून स्वतंत्र चयन करता हुआ दिखता नहीं है।

कैबिनेट मंत्री को शामिल‌ होने से स्वतंत्र नियुक्ति दिखता नहीं है यह मात्र दिखावा रह जाता है।

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराया जाना केवल काफी नहीं है बल्कि स्वतंत्र व निष्पक्ष दिखना भी चाहिए ।

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने एक उदाहरण देकर बताया कि बैटिंग वाली टीम ही अम्पायर चुने तो फैसला जो भी आएं उस पर संदेह बना रहेगा।

निर्वाचन आयोग का काम है स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराना।

ऐसे में क्या ज्ञानेश कुमार गुप्ता स्वत: अपने पद से त्याग पत्र देगें या सर्वोच्च न्यायालय उनको अपने निर्णय से खुद हटा सदर देगा।

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