आज हुआ भृगु मन्दिर कारिडोर का शिलान्यास : बदलेगा स्वरुप,100करोड की लागत से धर्मिक आस्था के साथ पर्यटन को बढ़ावा
Ajay Mishra
Sun, Sep 13, 2026
बलिया। महर्षि भृगु की पावन तपोभूमि बलिया में रविवार को वर्षों से देखे जा रहे भृगु कॉरिडोर के सपने ने धरातल पर शुरू शुरू हुआ। शहर स्थित ऐतिहासिक भृगु मंदिर परिसर में संत- महात्माओं के सानिध्य में परिवहन मंत्री एवं बलिया सदर विधायक दयाशंकर सिंह ने विधि-विधान से भूमि पूजन कर परियोजना की शुरुआत की। भूमि पूजन के बाद आयोजित भव्य भृगु महाआरती में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार, दीपों की रोशनी और महर्षि भृगु के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। भूमि पूजन के दौरान परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि भृगु कॉरिडोर का वर्षों पुराना सपना अब कागजों से निकलकर धरातल पर उतर चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मार्च में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी थी। परियोजना के प्रथम चरण के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जबकि महर्षि भृगु मंदिर के संपूर्ण निर्माण और विकास पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है।
दो चरणों में बदलेगा मंदिर परिसर का स्वरूप
भृगु कॉरिडोर के तहत मंदिर परिसर का धार्मिक और ऐतिहासिक स्वरूप बरकरार रखते हुए इसे आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। परियोजना को दो चरणों में पूरा करने का प्रस्ताव है। इसके तहत भव्य मुख्य प्रवेश द्वार, मंदिर परिसर का विस्तार, व्यापक सौंदर्यीकरण, चौड़े रास्ते, व्यवस्थित गलियारों सहित श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं को मंदिर में बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। साथ ही भृगु मंदिर को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परिवहन मंत्री ने कहा कि बलिया भृगु बाबा के नाम से जाना जाता है यह मंदिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाना जाएगा और भृगु कॉरिडोर केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि बलिया की आस्था, पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है। महर्षि भृगु की तपोभूमि को उसका गौरवपूर्ण स्वरूप दिलाने के साथ ही सरकार धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को विस्तार देने का काम कर रही है।
कार्यक्रम को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित सेवा सप्ताह के तहत विधानसभा क्षेत्र के 75 शक्ति केंद्रों से आईं प्रधानमंत्री आवास योजना की 81 महिला लाभार्थियों को सम्मानित किया गया। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने महिलाओं को नारियल, स्मृति चिन्ह, साड़ी सहित अन्य उपहार प्रदान किए।
भव्य महाआरती में उमड़ा आस्था का सैलाब
भूमि पूजन के बाद भृगु मंदिर परिसर में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। संत-महात्माओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच महाआरती संपन्न हुई। दीपों की रोशनी और जयघोष से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
भृगु मुनि से जुड़ी है बलिया की धार्मिक पहचान
बलिया की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान महर्षि भृगु की तपोभूमि के रूप में प्राचीन धार्मिक एवं लोक परंपराओं में दर्ज है। मान्यता है कि महर्षि भृगु ने गंगा तट पर स्थित इस क्षेत्र में तपस्या की थी, जिसके कारण यह क्षेत्र ‘भृगु क्षेत्र’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। शहर स्थित भृगु आश्रम और मंदिर आज भी इस परंपरा के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। स्थानीय परंपराओं में भृगु संहिता की रचना को भी इसी क्षेत्र से जोड़ा जाता है। हालांकि इसे मुख्यतः धार्मिक और स्थानीय मान्यता के रूप में देखा जाता है। महर्षि भृगु के शिष्य दर्दर मुनि की परंपरा भी बलिया के प्रसिद्ध ददरी मेले से जुड़ी मानी जाती है। गंगा-सरयू के संगम और सरयू की धारा को गंगा से मिलाने से जुड़ी लोककथाएं भी भृगु क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं।
भृगु कॉरिडोर के निर्माण से इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। बेहतर प्रवेश व्यवस्था, विकसित परिसर, चौड़े रास्ते, सौंदर्यीकरण और आधुनिक सुविधाओं के बाद यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।इसके साथ ही स्थानीय दुकानदारों, कारोबारियों और अन्य लोगों के लिए रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है।
कुल मिलाकर, भृगु कॉरिडोर की शुरुआत बलिया के लिए महज एक निर्माण परियोजना का शुभारंभ नहीं है। यह जिले की आस्था, इतिहास, संस्कृति और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने की कोशिश है। महर्षि भृगु की धरती पर विकास की नई शुरुआत हो चुकी है। परियोजना के पूरा होने के बाद भव्य और विकसित भृगु मंदिर बलिया की धार्मिक पहचान को प्रदेश और देश के पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
भृगु कॉरिडोर के निर्माण में सभी सप्त ऋषियों का भी संक्षिप्त विवरण संबंधी पट्टिका लगेगी। इसमें गौतम ऋषि, परशुराम ऋषि, महर्षि वाल्मीकि, मेधा ऋषि, कुशी ऋषि, पराशर ऋषि आदि से संबंधित विवरण रहेगा।
संत-महात्माओं और गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी
भूमि पूजन कार्यक्रम में पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त, पूर्व सांसद भरत सिंह, पूर्व मंत्री राजधारी सिंह, मुख्य विकास अधिकारी आलोक कुमार, स्वामी हरिहरानंद, बड़ी मठिया के रामूदार दास जी, गायत्री शक्तिपीठ के विजेंद्र चौबे, भृगु मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवकुमार मिश्र, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय, इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय समेत बड़ी संख्या में संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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