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: भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं,मां उचेड़ा भवानी

रसड़ा (बलिया)। 30 मार्च। (डीएनएन)। भारत में रहस्यमय और प्राचीन मन्दिरों की कोई कमी नहीं है। जी हां हम बात करते हैं वीरों की धरती, जवानों का देश, बागी बलिया उत्तरप्रदेश जहां एक ऐसा मन्दिर जनपद मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर दूर बलिया रसड़ा मार्ग पर चिलकहर ब्लाक अंतर्गत पहाड़पुर गांव के दक्षिण उचेड़ा गांव में स्थापित है। मां उचेड़ा भवानी का भव्य मंदिर जहां हर दिन चमत्कार होता है। जिसे भक्त देखकर हैरान हो जातें हैं। दरअसल इस मन्दिर में मौजूद माता की मूर्ति तीन रूपों में भक्तों को दिखाई पड़ती है। इस दिव्य मंदिर में स्थापित प्रतिमा की शिल्पकला इतनी अदभुत है कि माता का विग्रह सवेरे बाल्यावस्था का दिखाई देता है दिन चढ़ने के साथ क्रमशः किशोर, तरुण और सायंकाल वृद्धावस्था के रूप में दिखाई देता है। यह नजारा वाकई आधुनिक युग में हैरान कर देने वाल होता है। मां चण्डी देवी के दर्शन से भक्तों के दिन, भाग्य, भविष्य सब संवर जाते हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि 30मार्च से शुरु होकर 12 अप्रैल को समाप्त हो जायेगा। नवरात्र में मां चण्डी की आराधना से भक्तों के सम्पूर्ण मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। मां भवानी के रूप एवं महिमा की चर्चा सुनकर जनपद ही नहीं अपितु अन्य जनपदों के श्रद्धालु अपने को यहां आने से रोक नहीं पाते और बरबस ही परिवार संग खींचे चले आते हैं। मां की महिमा आज इतनी बढ़ गई है नवरात्र में यहां पूरे नौ दिन लोगों का रेला लगा रहता है। नवरात्रि में बहुत बड़ा मेला लगता जो पूरे नौ दिनों तक चलता है। मंदिर का इतिहास ऐसी मान्यता है कि लगभग 200 वर्ष पूर्व रसड़ा तहसील क्षेत्र अन्तर्गत गोपालपुर गांव निवासी रामचन्द्र चौबे अक्सर विंध्याचल की देवी मां विंध्यवासिनी के दर्शन पूजन को जाते रहे किंतु जब वह वृद्ध हो गए तो उन्होंने मां से गुहार लगाते हुए कहा कि मां अब मै वृद्ध हो गया हूं आपके पूजन के लिए इतना दूर कैसे आ पाऊंगा। यह बात सुनकर विंध्याचल की देवी ने उन्हें अगले दिन दिव्य रूप सपने में दिखाया कि उचेड़ा के जंगल में जमीन के अंदर मेरी प्रतिमा छिपी हुई है। सुबह होते ही उन्होंने ग्रामीणों संग वहां पहुंचकर खुदाई करायी तो मां चण्डी की प्रतिमा मिली और वहां स्थापित कर मंदिर का निर्माण कराया और तभी से पूजा-अर्चन शुरू हो गया। ऐसी मान्यता है कि मां सभी की मुरादें पुरी करती हैं। कलचुरी वंशज के लड़की के लड़कों का मुंडन कराना यहां काफी शुभ माना जाता है और यह परंपरा आज भी कायम है। क्षेत्र के रामचंद्र चौबे एवं क्षेत्रवासियों के सहयोग से इस मंदिर को भव्य रूप प्रदान किया गया। मन्दिर के सुन्दरी करण का वीणा इस समय शिशिर सिंह आई ए एस लखनऊ के खर्च से किया जा रहा है। मन्दिर के मंहथ श्री अजय गिरी ने बताया कि चैत्र व शारदीय नवरात्र में बहुत बड़ा मेला लगता है जिसमें क्षेत्र के लोग आकर मन्नतें मांगते हैं और उनकी मुरादें अवश्य पुरी होती हैं। सभी मनोकामना को पूर्ण करती मां चंडी की अलौकिक घटनाओं के कारण यह मंदिर श्रद्धा व भक्ति का केंद्र बन गया है। नवरात्रि के अलावे अन्य दिनों में भी हजारों श्रद्धालुओं यहां पूजा पाठ प्रतिदिन करते हैं।

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