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: नाबालिग लड़की के शादी को रोका गया और उसके दुष्परिणाम से अवगत करया गया

Admin

Wed, Apr 24, 2024
बलिया। थाना उभांव क्षेत्रान्तर्गत ग्राम के निवासी द्वारा अपनी 16 वर्षीय पुत्री का गुप्त रूप से बाल विवाह किया जाना निश्चित किया गया था। जिसकी जानकारी होने पर जिला प्रोवेशन अधिकारी द्वारा उक्त बाल विवाह को सम्पन्न होने से पहले पुलिस विभाग के सहयोग से बालिका के माता-पिता को परामर्श देकर बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा कानूनी पहलू का समझाया गया । उक्त बालिका के पिता ने बाल विवाह नही किये जाने हेतु शपथ पत्र दिया तथा लिखित रूप से अवगत कराया कि अपनी पुत्री का विवाह 18 वर्ष पूर्ण होने के उपरान्त ही करेंगे। इसके साथ ही जनपद वासियों से अपील किया जाता है कि बाल विवाह एक कुप्रथा है, इसे न होने दे, न ही करवायें। शादी के लिए लड़के की आयु 21 वर्ष एवं लड़की की आयु 18 वर्ष से कम नही होनी चाहिए। सामान्यतः समाज में लड़कियों को बोझ के रूप में देखा जाता है और समाज की रूढ़िवादी परम्परा के कारण लड़कियों की शादी जितनी जल्दी हो सके करा दी जाती है। शिक्षा की कमी और कानूनी जानकारी के अभाव के कारण भी बाल विवाह होते है। बाल विवाह कराने वाले और बाल विवाह में शामिल होने वालों व्यक्तियों जैसे पण्डित, मौलवी, पादरी, पिता एवं रिश्तेदार, दोस्त इत्यादि के विरूद्ध दण्ड के रूप में दो साल का कठोर कारावास अथवा एक लाख रूपये जुर्माना या दोनो का प्रावधान है। इस तरह के बाल विवाह का दुष्परिणाम यह होता है कि कम उम्र में बाल विवाह करने से लड़कियां परिपक्व न होने के कारण ज्यादा बच्चे भी पैदा हो जाते है और बच्चे कुपोषित होते है। जिससे जनसंख्या वृद्धि भी होती है। बाल विवाह एक ज्वलंत मुदा है। इस प्रकार का मामला आने पर उसे पुलिस विभाग, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्प लाइन 1098, पुलिस हेल्पलाईन नम्बर 112, 1090, 181 महिला हेल्पलाईन एवं जिलाधिकारी महोदय को लिखित या मौखिक रूप से सूचना दे सकते है। बाल विवाह को रोकने तथा बाल विवाह के दुष्परिणामें से आम जनता को जागरूक करने के लिये ब्लाक एवं तहसील स्तर पर बैठकों का आयोजन विभागीय कर्मचारियों द्वारा किया जाता है।

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